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Sunday, July 17, 2016


आखिर कब तक चुप रहें हम और सहें हम... लंबी खामोशी और एकतरफा मानसिक पीड़ा के बाद आखिर यह चुप्पी तोड़ना जरूरी हो गया था ... पढ़ें पत्रकारीय व्यथा भड़ास पर... शुक्रिया यशवंत भाई 

आदरणीय सुधीर जी,
एमडी, दैनिक भास्कर
महोदय
गत 30 जनवरी को मैंने (आदित्य पाण्डे, डीएनई डीबी स्टार ) आपको एक पत्र लिखा था जिसमे मैंने अपने साथ हो रहे बर्ताव के बारे में बताया था और इ्सका भी जिक्र किया था कि डीबी स्टार संपादक श्री बिनवाल जो कुछ कर रहे हैं उसके बारे मे सच सुनने से समूह संपादक श्री कलपेश यागनिक साफ इंकार कर चुके हैं। दरअसल मैंने यह तक कहा कि वे श्री बिनवाल को सामने बुला लें ताकि मैं मामले की हक़ीक़त सार्वजनिक तौर पर बता सकूँ। आपको पत्र भेजने के बाद आपके दफ्तर की ओर से तो कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन श्री बिनवाल ने यह कहते हुए मेरा रायपुर ट्रान्सफर कर दिया कि अब मैं इंदौर तो क्या एमपी मे भी काम नहीं कर सकता।
बिनवाल एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनके खिलाफ कई आरोप हैं कुछ मामलों में तो सबूत भी दिये गए हैं और अब तो हालात यहाँ तक पहुँच गए हैं कि खुद अदालत ने आदेश दिया कि पुलिस एफआइआर दर्ज करे, आपको पता ही होगा कि मामला जालसाज़ी और 420 के अलावा क्रिमिनल कोन्स्पिरेसी का है श्री बिनवाल सिर्फ ऐसे लोगों को पसंद करते हैं जो उनके ऐसे कामों मे साथ खड़े हों... इससे पहले खुद भास्कर ने भी इन महाशय पर भ्रस्टचार को लेकर जांच बैठाई थी कमाल कि बात यह है कि उनके भ्रस्टाचार के खिलाफ बोलने वाले हर व्यक्ति पर कार्रवाई हो चुकी है और यह सूची लंबी है जिसका मैं सबसे ताज़ा उदाहरण हूँ। आश्चर्य है कि व्हिसल ब्लौइंग पॉलिसी के खिलाफ खुद कंपनी ने व्हिसल ब्लौएर्स को प्रताड़ित करने की ताकत ऐसे (बिनवाल जैसे) लोगों को दे रखी है। बात मेरे ट्रान्सफर की नहीं है और मैं उसे लेकर तो कुछ कहना भी नहीं चाहता क्योंकि बिनवाल जी लंबे समय से चाहते रहे हैं कि मैं संस्थान छोड़ दूँ और उनके भ्रस्टाचार के लिए राह खाली कर दूँ।

पिछले दिनों मुझे यह लगने लगा कि शायद भास्कर समूह भी यही चाहता है। जाहिर है कि ऐसा महसूस होने के बाद संस्थान छोडना कोई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं रह जाता है लेकिन जिस संस्थान को मैंने अपने जीवन के 10 से ज्यादा साल दिए हों और जिस से मेरा 15 साल से ज्यादा का सतत संपर्क रहा हो, उसके शीर्ष प्रबंधन से मैं यह तो कह ही सकता हूँ कि मैंने कभी पत्रकारीय मूल्यों से समझौता नहीं किया। साथ ही यह भी कि जो भ्रस्टाचारी मेरे दुश्मन बन बैठे हैं वो भी मुझ पर किसी तरह का आक्षेप नहीं लगा सकते हैं। मैंने अपने पिछले पत्र मे भी आपके बहुमूल्य समय में से दो मिनट चाहे थे और आज फिर मैं यही चाहता हूँ कि मुझ जैसे व्यक्ति को संस्थान में रहना चाहिए या नहीं ये खुद आप तय करें। कृपया मुझे दो मिनट का समय दें ताकि मैं अपना पक्ष रख सकूँ और संभव हो तो अपना सक्रिय योगदान संस्थान को देते रहने के बारे मे निर्णय कर सकूँ।
धन्यवाद
आपका स्नेहाकांक्षी
आदित्य पाण्डे (14143)
डीएनई, डीबी स्टार रायपुर


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