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Friday, July 30, 2010

बदनाम हुए तो क्या. ..

मुझे इस नाम का इस्तेमाल करने में कोफ़्त होती है लेकिन यह सच है कि आज से चार साल पहले मेरे एक डॉक्टर मित्र ने कहा था कि राखी सावन्त किसी एक हाड़मांस के पुतले का नाम नहीं बल्कि एक सिण्ड्रोम का नाम है और कमाल यह कि यह सिण्ड्रोम काफी तेजी से फैलता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इस सिण्ड्रोम को खतरनाक स्तर पर ले जाकर खड़ा कर दिया है। इसे यूं समझें कि जब राहुल से डिंपी ने स्वयंवर रचाया था तो क्या उसे पता नहीं था कि राहुल में इंसानी आदतें कम और हैवानी आदतें ज्यादा हैं। क्या उसे पता नहीं था कि पहले प्यार को किस कदर मारपीट कर राहुल बेदखल कर चुका है। क्या उसे यह भी नहीं पता था कि ड्रग से लेकर सन्देही मौत तक के मामले में राहुल बुरी तरह या कहें पूरी तरह उलझे हुए हैं। दरअसल डिंपी सब जानते हुए भी राहुल के लिए इस वजह से मरी जा रही थीं क्योंकि गलत या सही-गलत तरीके से आई कमाई उन्हें लुभा रही थी। आज डिंपी जब राहुल के घर से बाहर हैं और(जाहिर है) सहानुभूति बटोरने की अगली कोशिश में हैं तो कई सवाल उठ खड़े होते हैं। पहली तो यही कि हमें उससे कितनी, क्यों और किस तरह की सहानुभूति होनी चाहिए। बीच में डिंपी राहुल का लॉयल्टी टेस्ट भी कर चुकी हैं और उसमें भी राहुल खरे तो नहीं उतरे थे। राहुल की बेहूदगी, भद्देपन और बेशर्मी से कतराने वालों की भी सहानुभूति डिंपी को नहीं मिलेगी तो कारण यही है कि सभी जानते हैं वह एक और राखी सावन्त से ज्यादा कुछ नहीं है। उसने जानबूझकर खुदको दांव पर लगाया क्योंकि कैमरों के लैश और खुद को महाजन परिवार का सदस्य बनाकर उसने अपना भविष्य काफी हद तक सुरक्षित कर लिया। पिटाई की कीमत पर कहीं ज्यादा नाम और दाम मिल गया, नुकसान सिर्फ इतना हुआ कि एक बेहद सड़ू और घटिया आदमी के साथ कुछ वक्त गुजारना पड़ा और वह भी उसकी प%ी बनकर, लेकिन अब सब कुछ ठिकाने पर है क्योंकि मेंटेनेंस मिल ही जाएगा। कैमरे की चमक भी इन्तजार कर ही रही है। यानी महाजन परिवार से मिला धन और नाम परी जिन्दगी किश्तों में खर्च करने की सुविधा मिल गई है। इस पूरे मसले में इतना तो साफ हो ही गया है कि महत्वाकांक्षा बढ़ने की दर अब इस कदर हो चुकी है कि न किसी को राहुल महाजन के साथ सम्बंध बनाने में ऐतराज है और न किसी को डिंपी महाजन बनने में शर्मिन्दगी है। रही बात राहुल की दरिन्दगी की तो उसे एक ही चीज रोक सकती हैं। वह शर्त यह है कि मीडिया से लेकर सीरियल तक (और उससे सम्बंध बनाने को उत्सुक लड़कियों तक) कोई उसे भाव ही न दे लेकिन यकीन मानिए ऐसा नहीं होगा क्योंकि चारों तरफ डिंपियों की बाढ़ आ गई है और डॉक्टर आज भी कहता है राखी सावन्त सिण्ड्रोम तेजी से फैल रहा है।

1 comment:

आनन्‍द पाण्‍डेय said...

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निरन्‍तर लिखते रहें ।


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